बिजनेस ITR — प्रोप्राइटर और दुकानदारों के लिए
बिजनेस इनकम का ITR कैसे भरें: ITR-3 या ITR-4, 44AD की लिमिट
बिजनेस वालों के लिए ITR का असली फैसला फॉर्म नहीं, तरीका है: आप presumptive स्कीम में आय घोषित करेंगे या पूरे खाते-बही के आधार पर, और यही तय करता है कि ITR-4 भरेंगे या ITR-3।
हर साल जुलाई-अगस्त में वही घबराहट होती है: कौन सा फॉर्म, कितना मुनाफा दिखाएं, बैंक में आए पैसे का हिसाब कैसे मिलाएं। वजह ये है कि ज्यादातर छोटे बिजनेस साल भर रिकॉर्ड नहीं रखते और रिटर्न के समय सब एक साथ करने बैठते हैं।
यह गाइड प्रोप्राइटर, दुकानदार, फ्रीलांसर और छोटे प्रोफेशनल के लिए है। इसमें ITR-3 और ITR-4 का फर्क, 44AD और 44ADA की presumptive स्कीम, टैक्स व्यवस्था चुनने का नियम और साल भर के रिकॉर्ड की बात है। एक जरूरी बदलाव: 1 अप्रैल 2026 से नया Income-tax Act, 2025 लागू हुआ है। वित्त वर्ष 2025-26 (AY 2026-27) की रिटर्न पुराने कानून की धाराओं पर आधारित है; आगे के सालों में धाराओं के नंबर और कुछ शब्द (जैसे ‘tax year’) बदले हैं, इसलिए हर साल incometax.gov.in पर उस साल के निर्देश देखें।
ITR-3 vs ITR-4: कौन सा फॉर्म आपके लिए
ITR-4 (Sugam) एक आसान फॉर्म है और वैकल्पिक है। आयकर विभाग के अनुसार इसे निवासी व्यक्ति, HUF और पार्टनरशिप फर्म (LLP नहीं) भर सकते हैं, जिनकी कुल आय 50 लाख रुपये तक है और बिजनेस या प्रोफेशन की आय presumptive आधार (44AD, 44ADA या 44AE) पर गिनी गई है। इसके साथ सैलरी, मकान से आय, ब्याज जैसी दूसरी आय और 1.25 लाख रुपये तक का सेक्शन 112A वाला लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन भी दिखाया जा सकता है।
ITR-4 नहीं भर सकते अगर आप किसी कंपनी में डायरेक्टर हैं, आपके पास अनलिस्टेड शेयर रहे हैं, विदेश में कोई संपत्ति या खाता है, या शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन है। ऐसे मामलों में, या जब आप presumptive स्कीम नहीं लेते और असली खाते-बही के आधार पर मुनाफा दिखाते हैं, तब ITR-3 भरना होता है। ITR-3 में बैलेंस शीट और प्रॉफिट-लॉस की जानकारी भी भरनी पड़ती है।
44AD limit और 44ADA: presumptive टैक्स कैसे काम करता है
सेक्शन 44AD छोटे बिजनेस के लिए है। इसमें आप मान लेते हैं कि टर्नओवर का एक तय प्रतिशत आपका मुनाफा है: नकद में मिली रकम पर 8 प्रतिशत और बैंक या डिजिटल तरीके से मिली रकम पर 6 प्रतिशत। इसकी सामान्य सीमा 2 करोड़ रुपये टर्नओवर है; बजट 2023 से ये सीमा 3 करोड़ हो जाती है अगर साल में नकद प्राप्ति कुल टर्नओवर के 5 प्रतिशत से ज्यादा न हो। आप चाहें तो तय प्रतिशत से ज्यादा मुनाफा भी घोषित कर सकते हैं।
सेक्शन 44ADA डॉक्टर, वकील, CA, इंजीनियर, आर्किटेक्ट जैसे तय प्रोफेशन के लिए है, जहां ग्रॉस रसीद का 50 प्रतिशत मुनाफा माना जाता है। इसकी सीमा 50 लाख रुपये है, जो नकद प्राप्ति 5 प्रतिशत से कम होने पर 75 लाख हो जाती है। फ्रीलांसर अपने काम के प्रकार के हिसाब से देखें कि वे 44ADA की सूची में आते हैं या 44AD में।
एक शर्त याद रखें: 44AD चुनने के बाद अगर आप अगले पांच साल में किसी साल इससे बाहर निकलकर कम मुनाफा दिखाते हैं, तो उसके बाद के पांच साल तक 44AD का फायदा नहीं मिलता। इसलिए इसे हर साल बदलने वाला विकल्प न समझें।
नई या पुरानी टैक्स व्यवस्था: बिजनेस वालों का खास नियम
नई टैक्स व्यवस्था डिफॉल्ट है। AY 2026-27 के लिए नई व्यवस्था में 12 लाख रुपये तक की टैक्सेबल आय वाले निवासी व्यक्ति को 60,000 रुपये तक का रिबेट मिलता है। पुरानी व्यवस्था में कटौतियां (जैसे 80C) मिलती हैं, पर स्लैब अलग हैं। अपने आंकड़ों के साथ दोनों का हिसाब लगाकर देखें।
नौकरी वालों के विपरीत, बिजनेस आय वालों के लिए व्यवस्था बदलना हर साल का खेल नहीं है। पुरानी व्यवस्था चुनने के लिए फॉर्म 10-IEA रिटर्न की नियत तारीख से पहले भरना होता है, और पुरानी से वापस नई व्यवस्था में आने का विकल्प जीवन में सिर्फ एक बार मिलता है। ये फैसला CA से बात करके ही लें।
आखिरी तारीख, ऑडिट और एडवांस टैक्स
बिना ऑडिट वाले मामलों में रिटर्न की तारीख पारंपरिक रूप से 31 जुलाई रही है। बजट 2026-27 में प्रस्ताव है कि ITR-1 और ITR-2 वाले 31 जुलाई तक भरें और बिना ऑडिट वाले बिजनेस मामले 31 अगस्त तक; साथ ही संशोधित रिटर्न 31 मार्च तक, 31 दिसंबर के बाद मामूली फीस के साथ, भरने का प्रस्ताव है। आपके साल पर कौन सी तारीख लागू है, ये पोर्टल पर उस साल की घोषणा से पक्का करें।
अगर टर्नओवर तय सीमा से ऊपर है, या आप 44AD की सीमा में होते हुए तय प्रतिशत से कम मुनाफा दिखाते हैं और आय टैक्स-योग्य है, तो टैक्स ऑडिट लग सकता है। ऑडिट रिपोर्ट रिटर्न की तारीख से कम से कम एक महीना पहले जमा करनी होती है। सालाना टैक्स देनदारी एक सीमा से ज्यादा हो तो एडवांस टैक्स भी भरना होता है; presumptive स्कीम वालों को ये एक किस्त में भरने की सुविधा है।
साल भर का रिकॉर्ड जो ITR को आसान बनाता है
एक अलग बिजनेस बैंक खाता रखें और ग्राहकों से ज्यादा से ज्यादा भुगतान UPI या बैंक से लें; इससे 44AD में 6 प्रतिशत वाली दर और 3 करोड़ वाली सीमा दोनों का फायदा मिल सकता है। हर महीने बिक्री का कुल, बड़े खर्च के बिल और GST रिटर्न (अगर हैं) एक फोल्डर में रखें। रिटर्न से पहले पोर्टल पर AIS और फॉर्म 26AS डाउनलोड करके देखें कि विभाग के पास आपकी कौन सी आय और TDS की जानकारी है, और उसे अपने हिसाब से मिलाएं।
GST वालों के लिए एक और जांच: GST रिटर्न की टर्नओवर और ITR की टर्नओवर में फर्क हो तो उसकी वजह (जैसे छूट वाली बिक्री) लिखकर रखें। हिसाब को आदत बनाने पर WOW Mentor की संबंधित ब्रीफिंग अंग्रेजी ऑडियो में हैं, पूरी ट्रांसक्रिप्ट के साथ।
आज की चेकलिस्ट
- 1.देखें कि आप ITR-4 की शर्तें (50 लाख तक आय, presumptive आय, डायरेक्टर न होना) पूरी करते हैं या नहीं
- 2.टर्नओवर में नकद और डिजिटल प्राप्ति का हिस्सा अलग-अलग निकालें
- 3.नई बनाम पुरानी व्यवस्था का हिसाब लगाएं और जरूरत हो तो 10-IEA समय पर भरें
- 4.रिटर्न से पहले AIS और 26AS डाउनलोड करके अपने आंकड़ों से मिलाएं
- 5.उस साल की आखिरी तारीख incometax.gov.in पर पक्की करके कैलेंडर में डालें
संबंधित ब्रीफिंग
अंग्रेज़ी ऑडियो, पूरे ट्रांसक्रिप्ट के साथ।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
44AD की लिमिट कितनी है?
सामान्य सीमा 2 करोड़ रुपये टर्नओवर है, और अगर साल की नकद प्राप्ति कुल टर्नओवर के 5 प्रतिशत से ज्यादा नहीं है तो 3 करोड़। नए Income-tax Act, 2025 में धारा का नंबर बदल सकता है, इसलिए हर साल पोर्टल पर पुष्टि करें।
ITR-3 कौन भरता है?
वे व्यक्ति और HUF जिनकी बिजनेस या प्रोफेशन की आय है और जो ITR-1, ITR-2 या ITR-4 के पात्र नहीं हैं, जैसे जो पूरे खाते-बही से मुनाफा दिखाते हैं या कंपनी में डायरेक्टर हैं।
क्या दुकानदार खुद ITR-4 भर सकता है?
हां, incometax.gov.in पर ई-फाइलिंग में ITR-4 काफी हद तक पहले से भरा आता है। फिर भी बिक्री, बैंक एंट्री और AIS का मिलान खुद करें, और ऑडिट या व्यवस्था बदलने जैसे मामलों में CA से सलाह लें।
WOW Mentor की ऑडियो हिंदी में है?
नहीं, ब्रीफिंग अंग्रेजी और कोरियन में हैं, पूरी ट्रांसक्रिप्ट के साथ। ये हिंदी गाइड मुफ्त हैं।