फ्रेंचाइजी — जाँच और सावधानी
फ्रेंचाइजी कैसे लेते हैं: फीस, रॉयल्टी, एग्रीमेंट और फर्जीवाड़ा
फ्रेंचाइजी में आप एक ब्रांड और तरीका ख़रीदते हैं, जोखिम नहीं बेचते; पैसा आपका लगता है, इसलिए जाँच भी आपकी होनी चाहिए।
'कम निवेश, पक्की कमाई, बड़ा ब्रांड' जैसे विज्ञापन देखकर बहुत से लोग फ्रेंचाइजी को सुरक्षित बिज़नेस मान लेते हैं। कुछ फ्रेंचाइजी सच में अच्छा काम करती हैं, क्योंकि उनके पास जाँचा-परखा तरीका, सप्लाई और पहचान होती है। पर कई मामलों में निवेशक को बाद में पता चलता है कि रॉयल्टी, महँगी सप्लाई और किराए के बाद हाथ में बहुत कम बचता है।
इससे भी बड़ा ख़तरा है फर्जी फ्रेंचाइजी, जिसमें बड़े ब्रांड का नाम लेकर वेबसाइट, कॉल और 'रजिस्ट्रेशन फीस' के ज़रिए पैसे ठगे जाते हैं। यह गाइड दोनों से बचाती है: असली ऑफ़र का हिसाब कैसे लगाएँ, और नकली ऑफ़र कैसे पहचानें।
फ्रेंचाइजी बिजनेस में आप असल में क्या ख़रीदते हैं
फ्रेंचाइजी में ब्रांड का नाम, दुकान का डिज़ाइन, प्रोडक्ट या मेन्यू, सप्लाई चेन, ट्रेनिंग और ऑपरेशन का तरीका मिलता है। बदले में आप शुरुआती फ्रेंचाइजी फीस देते हैं, दुकान का सेटअप अपने ख़र्च पर करते हैं, और आमतौर पर हर महीने बिक्री का एक हिस्सा रॉयल्टी और मार्केटिंग फीस के रूप में देते हैं।
ध्यान रखिए कि दुकान का किराया, स्टाफ़, बिजली, लोकल लाइसेंस और घाटे का जोखिम आपका ही रहता है। ब्रांड की ताक़त तभी काम आती है जब आपकी जगह, आपका शहर और वहाँ के ग्राहक उस ब्रांड के लिए सही हों। किसी मेट्रो में चलने वाला मॉडल छोटे शहर में उसी तरह चले, यह ज़रूरी नहीं।
पूरा पैसा गिनिए: फीस, रॉयल्टी और पेबैक
फ्रेंचाइजी से लिखित में ये सब माँगिए: फ्रेंचाइजी फीस, सिक्योरिटी डिपॉज़िट, इंटीरियर और मशीनरी की लागत, शुरुआती स्टॉक, रॉयल्टी का प्रतिशत, मार्केटिंग फीस, सॉफ़्टवेयर या अन्य मासिक शुल्क, और रिन्यूअल फीस। फिर अपनी जगह का किराया, स्टाफ़ और बाकी ख़र्च जोड़िए।
एक उदाहरण (सारे नंबर काल्पनिक हैं): कुल निवेश 25 लाख रुपये, महीने की बिक्री 6 लाख। माल की लागत 40 प्रतिशत यानी 2.4 लाख, रॉयल्टी 6 प्रतिशत यानी 36,000, मार्केटिंग फीस 2 प्रतिशत यानी 12,000, किराया 90,000, स्टाफ़ 1.2 लाख और बाकी ख़र्च 42,000। कुल ख़र्च 5.4 लाख, बचत 60,000 महीना। 25 लाख वापस आने में लगभग 42 महीने, यानी साढ़े तीन साल, और वह भी आपकी अपनी तनख़्वाह और लोन के ब्याज से पहले।
अब यही हिसाब बिक्री 20 प्रतिशत कम मानकर कीजिए। अगर तब घाटा हो जाता है, तो समझिए कि आप कितने पतले धागे पर हैं। जो फ्रेंचाइज़र 'महीने की पक्की कमाई' का वादा करे पर असली दुकानों के आँकड़े न दिखाए, उसके ऑफ़र को शक की नज़र से देखिए।
मौजूदा फ्रेंचाइजी मालिकों से सीधे बात कीजिए
सबसे भरोसेमंद जानकारी उन लोगों से मिलती है जो पहले से वह फ्रेंचाइजी चला रहे हैं। सिर्फ़ उन्हीं से बात मत कीजिए जिनका नंबर कंपनी दे; ख़ुद दुकानों पर जाइए, अलग-अलग शहरों में, और अगर हो सके तो किसी ऐसे से भी मिलिए जिसने फ्रेंचाइजी बंद कर दी हो।
उनसे पूछिए: असली निवेश कितना लगा और अनुमान से कितना ज़्यादा, बराबरी पर आने में कितने महीने लगे, सप्लाई समय पर और ठीक दाम पर आती है या नहीं, कंपनी की ट्रेनिंग और मदद कैसी है, और क्या वे दोबारा यही फ्रेंचाइजी लेंगे। आख़िरी सवाल का जवाब अक्सर सब कुछ बता देता है।
एग्रीमेंट की वे धाराएँ जो बाद में सबसे ज़्यादा चुभती हैं
फ्रेंचाइजी में आपकी सबसे बड़ी सुरक्षा एग्रीमेंट ही है, इसलिए दस्तख़त से पहले किसी वकील से ज़रूर पढ़वाइए। ख़ास ध्यान दीजिए: एग्रीमेंट कितने साल का है और रिन्यूअल की शर्तें क्या हैं; क्या आपको तय इलाके में एक्सक्लूसिव अधिकार मिलता है या कंपनी पास में ही दूसरी दुकान खोल सकती है; क्या कच्चा माल सिर्फ़ कंपनी से ख़रीदना ज़रूरी है और उसका दाम कौन तय करेगा।
बाहर निकलने की धाराएँ भी उतनी ही अहम हैं: क्या आप फ्रेंचाइजी किसी और को बेच सकते हैं, कंपनी किन कारणों से एग्रीमेंट ख़त्म कर सकती है, सिक्योरिटी डिपॉज़िट कब और कैसे लौटेगा, बंद करने के बाद कितने समय तक आप उसी तरह का बिज़नेस नहीं कर सकते, और विवाद होने पर मामला किस शहर में चलेगा। ये बातें शुरू में छोटी लगती हैं, पर मुश्किल समय में यही तय करती हैं कि आपका कितना पैसा बचेगा।
फर्जी फ्रेंचाइजी फ्रॉड कैसे पहचानें
बड़े और चर्चित ब्रांडों के नाम पर फर्जी फ्रेंचाइजी ऑफ़र आम हैं। अक्सर तरीका यह होता है: मिलती-जुलती वेबसाइट या सोशल मीडिया विज्ञापन, फ़ोन पर 'मैनेजर' से बात, पहले छोटी 'रजिस्ट्रेशन फीस', फिर 'NOC फीस', 'एग्रीमेंट स्टांप', 'सिक्योरिटी' और हर बार नया बहाना। पैसा किसी निजी खाते या UPI ID में माँगा जाता है और जल्दी करने का दबाव बनाया जाता है।
बचाव के नियम सीधे हैं: ब्रांड की आधिकारिक वेबसाइट ख़ुद टाइप करके खोलिए और देखिए कि वह फ्रेंचाइजी देता भी है या नहीं; सिर्फ़ कंपनी के नाम वाले बैंक खाते में, लिखित एग्रीमेंट के बाद ही भुगतान कीजिए; कंपनी के ऑफ़िस या चल रही दुकान पर ख़ुद जाइए; और 'गारंटीड कमाई' या 'सिर्फ़ आज का ऑफ़र' सुनते ही रुक जाइए। अगर ठगी हो जाए तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर कॉल कीजिए या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कीजिए; जल्दी शिकायत से पैसा रुकवाने की संभावना बढ़ती है।
फ्रेंचाइजी लें या अपना ब्रांड बनाएँ?
अगर आपके पास बिज़नेस चलाने का अनुभव कम है और आप एक तैयार तरीका चाहते हैं, तो एक जाँची-परखी फ्रेंचाइजी सीखने का अच्छा रास्ता हो सकती है। अगर आपको अपने इलाके के ग्राहकों की अच्छी समझ है और आप रॉयल्टी की जगह वह पैसा अपनी ब्रांडिंग में लगा सकते हैं, तो अपना छोटा ब्रांड लंबे समय में ज़्यादा आज़ादी दे सकता है।
जो भी चुनें, फैसला हिसाब और ज़मीनी जाँच से कीजिए, विज्ञापन से नहीं। छोटी टीम के साथ मुनाफ़े वाला बिज़नेस कैसे खड़ा होता है, इस पर WOW Mentor की नीचे दी गई ब्रीफ़िंग्स उपयोगी हैं; ये अंग्रेज़ी ऑडियो में हैं और पूरी ट्रांसक्रिप्ट के साथ आती हैं।
आज की चेकलिस्ट
- 1.फ्रेंचाइज़र से सारी फीस, रॉयल्टी, सप्लाई शर्तें और असली दुकानों के आँकड़े लिखित में माँगें
- 2.पेबैक का हिसाब बिक्री 20 प्रतिशत कम मानकर भी करें
- 3.कम से कम पाँच मौजूदा या पुराने फ्रेंचाइजी मालिकों से ख़ुद जाकर बात करें
- 4.एग्रीमेंट वकील से पढ़वाएँ: इलाका, सप्लाई, रिन्यूअल, एग्ज़िट और डिपॉज़िट की धाराएँ
- 5.भुगतान सिर्फ़ कंपनी के आधिकारिक खाते में और एग्रीमेंट के बाद करें; ठगी हो तो 1930 पर तुरंत कॉल करें
संबंधित ब्रीफिंग
अंग्रेज़ी ऑडियो, पूरे ट्रांसक्रिप्ट के साथ।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
फ्रेंचाइजी लेने के लिए कितना पैसा चाहिए?
यह ब्रांड, सेक्टर और शहर के हिसाब से बहुत अलग होता है, कुछ लाख से लेकर करोड़ों तक। फ्रेंचाइजी फीस के अलावा इंटीरियर, मशीनरी, डिपॉज़िट, शुरुआती स्टॉक और पहले कुछ महीनों का किराया व तनख़्वाह भी अपने पास रखिए।
कैसे पता करें कि फ्रेंचाइजी ऑफ़र असली है या फर्जी?
ब्रांड की आधिकारिक वेबसाइट ख़ुद खोलकर देखिए कि वह फ्रेंचाइजी देता है या नहीं, और वहाँ दिए संपर्क से ही बात कीजिए। निजी खाते में पैसा माँगना, बार-बार नई फीस, जल्दबाज़ी का दबाव और पक्की कमाई का वादा, ये सब धोखे के संकेत हैं।
क्या फ्रेंचाइजी में घाटा नहीं होता?
होता है। ब्रांड पहचान और तरीका देता है, पर किराया, स्टाफ़, जगह का चुनाव और घाटे का जोखिम फ्रेंचाइजी लेने वाले का रहता है। इसलिए मौजूदा मालिकों से बात और कम बिक्री वाला हिसाब ज़रूरी है।